वार्षिक महोत्सव

वर्ष भर संचालित कलाओं के प्रशिक्षण को प्रदर्शित करता निर्माण 2025 जिसे नाम मिला “कौशल उत्सव 2025”।

प्रतिभास्थली में आयोजित हुआ भव्य मेला महोत्सव।
छात्राओं की कलाओं, कौशल और हुनर का मिला परिचय।।

प्रतिभास्थली के प्रांगण में, वर्ष भर संचालित कलाओं के प्रशिक्षण को प्रदर्शित करता निर्माण 2025 जिसे नाम मिला “कौशल उत्सव 2025”।

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वार्षिक महोत्सव

भारत की वीरांगनाओं के अदम्य साहस और शौर्य की विजयगाथा को प्रस्तुत किया गया। 

वार्षिकोत्सव 2022 के मंच से भारत की वीरांगनाओं के अदम्य साहस और शौर्य की विजयगाथा को प्रस्तुत किया गया। खेल-खेल में अंग्रेजों की भारत विजय और भारतीयों द्वारा अंग्रेजों की पराजय का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया गया। छात्राओं द्वारा अतीत की वीरांगनाओं को पहचान देना भारतीय इतिहास को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय की कुलपति महोदया डॉ. नीलिमा गुप्ता ने की।

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वार्षिक महोत्सव

प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ ने भारत का स्वर्णिम अतीत- भाग 2 की भव्य प्रस्तुति दी। 

प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ ने अपने वार्षिकोत्सव “निर्माण-2019” में भारत का स्वर्णिम अतीत- भाग 2 की भव्य प्रस्तुति दी। स्वर्णिम अतीत में प्राचीन काल में भारतीयों के द्वारा की गई अद्भुत खोजों को उजागर किया गया जो आज वर्तमान में विदेशियों के नाम से प्रसिद्ध हैं। समग्र कार्यक्रम के द्वारा ‘विश्व के राजगुरु’ भारत की अस्मिता को लौटाने और भारतीयों के सोए हुए आत्म गौरव को जगाने का छात्राओं ने आह्वाहन किया।

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वार्षिक महोत्सव

भारत की ज्वलंत समस्याओं की जीवंत झाकीं का नजारा करवाया प्रतिभास्थली वार्षिकोत्सव निर्माण- 2018 ने।

पाश्चात्य संस्कृति की पिछलग्गू बनी भारतीय संस्कृति की अपंगता, नौकरी के बोझ तले कराहती मानवता, अँग्रेजी की मखमली मार से दम तोड़ती हिंदी भाषा और संसाधन,समय और बुद्धि के अपव्यय से पीड़ित भारतमाता… ऐसी भारत की ज्वलंत समस्याओं की जीवंत झाकीं का नजारा करवाया प्रतिभास्थली वार्षिकोत्सव निर्माण- 2018 ने।

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वार्षिक महोत्सव

निर्माण 2017 प्रतिभास्थली ने अपने प्राणदाता की आराधना के रूप में मनाया। छाया नाटक, मूक अभिनय, रोशनी अभिनय, रेत कला, चरखा प्रस्तुति, योग, शास्त्रीय नृत्य आदि प्रस्तुत किये गये।

संयम पथ के अविराम यात्री 108 आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज का 50वां दीक्षा वर्ष भारत में ‘संयम स्वर्ण महोत्सव’ के रूप में मनाया जा रहा है। इस भक्ति की धारा में निर्माण 2017 प्रतिभास्थली ने अपने प्राणदाता की आराधना के रूप में मनाया। आचार्यश्री के जीवन पर आधारित कार्यक्रम जैसे छाया नाटक, मूक अभिनय, रोशनी अभिनय, रेत कला, चरखा प्रस्तुति, योग, शास्त्रीय नृत्य आदि प्रस्तुत किये गये।

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वार्षिक महोत्सव

अतीत की कल-कल से आने वाले भारत के पल-पल को सजाने के लिए छात्राओं ने कई विहंगम दृश्य और कार्यशालाएँ आयोजित की।

आकाश की ऊँचाईयों को छूने के साथ बहुत जरुरी होता है धरती से गहरा रिश्ता बनायें रखना, इसीलिए प्रतिभास्थली में पुनः संपन्न हुआ एक और वार्षिकोत्सव (निर्माण-2016) जहाँ संस्कार के धरातल पर अतीत की कल-कल से आने वाले भारत के पल-पल को सजाने के लिए छात्राओं ने कई विहंगम दृश्य और कार्यशालाएँ आयोजित की।।

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वार्षिक महोत्सव

प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ ने भारत का स्वर्णिम अतीत- भाग 2 की भव्य प्रस्तुति दी। 

प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ ने अपने वार्षिकोत्सव “निर्माण-2019” में भारत का स्वर्णिम अतीत- भाग 2 की भव्य प्रस्तुति दी। स्वर्णिम अतीत में प्राचीन काल में भारतीयों के द्वारा की गई अद्भुत खोजों को उजागर किया गया जो आज वर्तमान में विदेशियों के नाम से प्रसिद्ध हैं। समग्र कार्यक्रम के द्वारा ‘विश्व के राजगुरु’ भारत की अस्मिता को लौटाने और भारतीयों के सोए हुए आत्म गौरव को जगाने का छात्राओं ने आह्वाहन किया।

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2014

वार्षिक महोत्सव

निर्माण 2014 में भारत के अतीत और आधुनिकता के तुलनात्मक अध्ययन ने भारत के प्रति गौरव जागृत किया है और शहीदों की स्मृतियों के रंगमंचन ने सभी के ह्रदय में देशभक्ति का रंग भर दिया।

पाश्चात्य संस्कृति रुपी दानवता के पगतले कुचलती भारतीय संस्कृति रूपी मानवता को जीवंत करने, अपनों से अपनों की पहचान करने, नारी जाती का सम्मान बढ़ाने और भ्रष्टाचार मुक्त भारत की पहचान बनाने ‘स्वर्ग से धरती पर उतरे गाँधी’

भारत के अतीत और आधुनिकता का तुलनात्मक अध्ययन भारत के प्रति गौरव जागृत करता है और शहीदों की स्मृतियाँ का रंगमंचन ह्रदय में देशभक्ति के हिलोरे पैदा करता है | इन्ही भावनाओं को साकार रूप देता है – निर्माण 2014

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2013

वार्षिक महोत्सव

आधुनिकता की ओर ले जाते इण्डिया के स्थान पर भारतीयता की पहचान दिलाने वाले भरत के भारत का मान बढ़ाता है निर्माण – 2013। 

जहाँ भारत कृषि, व्यापार, विज्ञान, कला, चिकित्सा व नक्षत्र विज्ञान का केन्द्र रहा वहीं चेतना को झंकृत करने वाले गुरु-शिष्य संबंधो की पावन भूमि रहा है । गुरु वह जो शिष्य का दोनों लोकों में मान बढ़ावें और शिष्य वह जो गुरु आज्ञा को ही जीवन माने – इन द्रश्यों को द्रष्टिगोचर करवाता है प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ ।

आधुनिकता की ओर ले जाते इण्डिया के स्थान पर भारतीयता की पहचान दिलाने वाले भरत के भारत का मान बढ़ाता निर्माण – 2013

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